Saturday, 3 September 2016

श्री दरियाव जी महाराज की दिव्य वाणी जी के कुछ दोहे

श्री दरियाव जी महाराज की दिव्य वाणी जी के कुछ दोहे। 

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धन्येवाद आपका मित्र

रामस्नेही राधेश्याम रावोरिया




















































Thursday, 1 September 2016

अपारख का अंग (श्री दरियाव वाणी)


हीरा हलाहल क्रोड का,जा की कौडी मौल।
जन दरिया कीमत बिना,बरतै डाँवाडोल॥
हीरा लेकर जौहरी,गया गँवारै देस।
देखा जिन कंकर कहा,भीतर परख न लेस॥
दरिया हीरा क्रोड का,कीमत लखै न कोय।
जबर मिलै कोई जौहरी,तबही पारख होय॥
आई पारख चेतन भया,मन दे लीना मोल।
गाँठ बाँध भीतर धसा,मिट गई डाँवाडोल॥
कंकर बाँधा गाँठडी,कर हीरा का भाव।
खोला कंकर नीसरा,झूठा यही सुभाव॥