Saturday, 3 September 2016
Friday, 2 September 2016
Thursday, 1 September 2016
अपारख का अंग (श्री दरियाव वाणी)
हीरा हलाहल क्रोड का,जा की कौडी मौल।
जन दरिया कीमत बिना,बरतै डाँवाडोल॥
हीरा लेकर जौहरी,गया गँवारै देस।
देखा जिन कंकर कहा,भीतर परख न लेस॥
देखा जिन कंकर कहा,भीतर परख न लेस॥
दरिया हीरा क्रोड का,कीमत लखै न कोय।
जबर मिलै कोई जौहरी,तबही पारख होय॥
जबर मिलै कोई जौहरी,तबही पारख होय॥
आई पारख चेतन भया,मन दे लीना मोल।
गाँठ बाँध भीतर धसा,मिट गई डाँवाडोल॥
गाँठ बाँध भीतर धसा,मिट गई डाँवाडोल॥
कंकर बाँधा गाँठडी,कर हीरा का भाव।
खोला कंकर नीसरा,झूठा यही सुभाव॥
खोला कंकर नीसरा,झूठा यही सुभाव॥
Friday, 26 August 2016
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